नमस्ते छात्रों! जीवन सहायता में आपका स्वागत है। हम यहां आपकी पढ़ाई में मदद करने के लिए हैं और आज हम एक बहुत ही दिलचस्प विषय पर बात करने जा रहे हैं – भारत के महान संत। हमारे देश में कई महान संत हुए हैं जिन्होंने हमें सही रास्ता दिखाया है। आज हम उन्हीं में से एक, मेरे पसंदीदा भारतीय संत के बारे में जानेंगे।
मेरे प्रिय संत पर 10 पंक्तियाँ
भारत की भूमि हमेशा से ही महान संतों और गुरुओं की भूमि रही है। इन संतों ने अपने ज्ञान और शिक्षाओं से न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को एक नई दिशा दी है। ऐसे ही एक महान संत थे स्वामी विवेकानंद, जो मेरे प्रिय संत हैं। उनके जीवन और विचारों ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है और आज भी कर रहे हैं। आइए, मेरे प्रिय संत स्वामी विवेकानंद के बारे में 10 पंक्तियों में जानते हैं:
- स्वामी विवेकानंद भारत के एक महान संत और सच्चे देशभक्त थे।
- उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था और उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था।
- उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था।
- नरेंद्रनाथ बचपन से ही बहुत बुद्धिमान, जिज्ञासु और ऊर्जावान थे।
- उनके गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस थे, जिन्होंने उन्हें ‘स्वामी विवेकानंद’ नाम दिया।
- स्वामी विवेकानंद ने 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में एक प्रसिद्ध भाषण दिया था।
- उन्होंने अपने भाषण से पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म का मान बढ़ाया।
- उनका प्रसिद्ध नारा था – “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए”।
- उनका जन्मदिन, 12 जनवरी, भारत में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
- 4 जुलाई 1902 को उन्होंने अंतिम सांस ली, लेकिन उनके विचार आज भी अमर हैं।
विस्तार से जानकारी
अब हम इन पंक्तियों को थोड़ा विस्तार से समझेंगे ताकि आप स्वामी विवेकानंद के जीवन को और भी गहराई से जान सकें।
1. एक महान संत और देशभक्त
स्वामी विवेकानंद केवल एक संत ही नहीं, बल्कि एक महान देशभक्त भी थे। उन्होंने भारत के गौरव को पूरी दुनिया के सामने रखा। वह चाहते थे कि भारत के युवा अपनी जड़ों को पहचानें और देश को फिर से विश्व गुरु बनाने में अपना योगदान दें।
2. बचपन का नाम और जन्म
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता के एक कुलीन बंगाली परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। बचपन से ही उनमें आध्यात्मिकता के प्रति गहरा झुकाव था और वे हमेशा ईश्वर के अस्तित्व के बारे में सवाल पूछते रहते थे।
3. माता-पिता
उनके पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक वकील थे और उनकी माता भुवनेश्वरी देवी एक धार्मिक विचारों वाली महिला थीं। उनकी माता के धार्मिक संस्कारों का नरेंद्रनाथ पर गहरा प्रभाव पड़ा।
4. बुद्धिमान और जिज्ञासु स्वभाव
नरेंद्रनाथ बचपन से ही असाधारण रूप से बुद्धिमान थे। उनकी याददाश्त बहुत तेज थी और वे किसी भी चीज को बहुत जल्दी सीख लेते थे। वे हमेशा हर चीज के पीछे का कारण जानने के लिए उत्सुक रहते थे।
5. गुरु रामकृष्ण परमहंस
ईश्वर की खोज में नरेंद्रनाथ कई लोगों से मिले, लेकिन उन्हें कहीं भी संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। अंत में उनकी मुलाकात श्री रामकृष्ण परमहंस से हुई। रामकृष्ण परमहंस ने नरेंद्रनाथ के सभी संदेहों को दूर किया और उन्हें आत्म-साक्षात्कार का मार्ग दिखाया। उन्होंने ही नरेंद्रनाथ को ‘विवेकानंद’ नाम दिया।
6. शिकागो का ऐतिहासिक भाषण
साल 1893 में स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वहां उन्होंने “अमेरिका के भाइयों और बहनों” के साथ अपने भाषण की शुरुआत की, जिसने पूरी दुनिया का दिल जीत लिया। इस भाषण ने पश्चिम में भारतीय दर्शन और हिंदू धर्म के बारे में एक नई समझ पैदा की।
7. भारतीय संस्कृति का प्रचार
शिकागो भाषण के बाद, स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका और इंग्लैंड में कई व्याख्यान दिए। उन्होंने दुनिया को वेदांत और योग के भारतीय दर्शन से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि सभी धर्म एक ही सत्य की ओर ले जाते हैं।
8. प्रेरणादायक नारा
स्वामी विवेकानंद का नारा “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए” युवाओं के लिए एक शक्तिशाली प्रेरणा स्रोत है। यह हमें आलस्य त्यागकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करने के लिए प्रेरित करता है।
9. राष्ट्रीय युवा दिवस
स्वामी विवेकानंद का जीवन और उनके विचार युवाओं के लिए एक आदर्श हैं। इसीलिए भारत सरकार ने उनके जन्मदिन, 12 जनवरी, को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में घोषित किया है। यह दिन हमें उनके दिखाए रास्ते पर चलने की याद दिलाता है।
10. अमर विचार
स्वामी विवेकानंद ने मात्र 39 वर्ष की आयु में 4 जुलाई 1902 को महासमाधि ले ली। लेकिन उनके विचार, उनकी शिक्षाएं और उनका संदेश आज भी जीवित हैं और पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
स्वामी विवेकानंद के गुरु कौन थे?
स्वामी विवेकानंद के गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस थे। उन्होंने ही नरेंद्रनाथ दत्त को विवेकानंद नाम दिया था।
स्वामी विवेकानंद का असली नाम क्या था?
स्वामी विवेकानंद का असली नाम नरेंद्रनाथ दत्त था।
राष्ट्रीय युवा दिवस कब मनाया जाता है?
राष्ट्रीय युवा दिवस हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है।
स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में भाषण कब दिया था?
स्वामी विवेकानंद ने 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में अपना प्रसिद्ध भाषण दिया था।
हमें उम्मीद है कि मेरे प्रिय संत पर लिखा यह लेख आपको पसंद आया होगा। स्वामी विवेकानंद का जीवन हमें सिखाता है कि आत्मविश्वास, कड़ी मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण से हम कुछ भी हासिल कर सकते हैं। अधिक अध्ययन सामग्री के लिए, आप हमारी वेबसाइट जीवन सहायता पर जा सकते हैं।